सिर्फ 500 लेकर मुंबई आए थे धीरूभाई, पिता की ये 5 बातें कभी नहीं भूलते हैं मुकेश अंबानी

सिर्फ 500 लेकर मुंबई आए थे धीरूभाई, पिता की ये 5 बातें कभी नहीं भूलते हैं मुकेश अंबानी

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Mukesh Ambani and Dhirubhai Ambani: मुकेश अंबानी आज जिस मुकाम पर हैं, उसके लिए वो अपने परिवार के योगदान को हमेशा जिम्मेदार मानते हैं। कहा जाता है कि भले ही वो कितने भी व्यस्त क्यों न हों, बगैर अपनी मां के आशीर्वाद के वो घर से बाहर कदम नहीं रखते हैं। न ही रात को बिना नीता अंबानी से अपने दिन का हाल साझा किये बिना वो बिस्तर पर जाते हैं। इतना ही नहीं, संडे को अक्सर वो फैमिली डे ही करार देते हैं। दुनिया के टॉप-10 अमीर उद्योगपतियों की सूची में शुमार मुकेश अंबानी अपने पिता धीरूभाई अंबानी से बेहद प्रेरित और प्रभावित रहे हैं।

धीरूभाई अंबानी के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने ही भारत में कारोबार करने के तरीकों में बदलाव किया। गुजरात के चोरवाड में जन्मे धीरूभाई के पिता गांव के स्कूल में शिक्षक थे। लेकिन उन्होंने अपने दम पर इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की। हाई स्कूल तक की पढ़ाई करने वाले धीरूभाई ने जीवन के सबक को इतने अच्छे से समझा कि स्वयं के बलबूते पर अपना औद्योगिक साम्राज्य हासिल किया।

बताया जाता है कि केवल 500 रुपये लेकर उन्होंने सपनों की मायानगरी मुंबई में प्रवेश किया था। वहीं, साल 2006 में फोर्ब्स के दुनिया के सबसे रईसों में धीरूभाई 138वें नंबर पर थे। उन्हीं के नक्शे कदम पर चलकर बड़े बेटे मुकेश अंबानी ने कारोबार को आगे बढ़ाया और अपना अलग नाम कमाया। करीब 81 अरब डॉलर की संपत्ति के मालिक मुकेश अंबानी आज भी अपने पिता की 5 बातों को याद रखते हैं।

उनके अनुसार धीरूभाई हमेशा कहते थे कि एक अच्छे व्यापारी को ये पता होना चाहिए कि उसका लक्ष्य क्या है। वो कहते थे कि बगैर लक्ष्य तय किये कोई व्यक्ति कितनी भी मेहनत क्यों न कर ले, उसे सफलता प्राप्त नहीं होगी।

एक इंटरव्यू में मुकेश ने बताया था कि धीरूभाई अंबानी बेहद प्रोफेशनल थे। कामकाज में वो रिश्तों को भी पार्टनरशिप का ही नाम देते थे। उनके पिता कहते थे कि बिजनेस पार्टनरशिप चलती है, न कि रिलेशनशिप। मुकेश अंबानी बताते हैं कि व्यापार में धीरूभाई बच्चों तक को पार्टनर्स मानते थे।

धीरूभाई अंबानी का सोचना ये था कि व्यक्ति चाहे कोई भी कार्य करे, लेकिन उसमें सकारात्मक रवैया रखना अति आवश्यक है। उनके मुताबिक जो लोग हर परिस्थिति में अपने एटिट्यूड को पॉजिटिव रखते हैं, सफलता उन्हें ही मिलती है। साथ ही, उनके मुताबि नकारात्मकता से भरे लोग हर जगह होते हैं, ऐसे में उनसे दूरी बनाना ही बेहतर है।

मुकेश अंबानी के पिता के अनुसार सफलता प्राप्त करना बाएं हाथ का खेल नहीं है। इसमें कभी हार मिलेगी तो कभी नाकामयाबी। लेकिन उससे निराश न होकर सीख लेनी चाहिए और हर मुसीबत का डटकर सामना करना चाहिए।

बिजनेस में सफलता सिर्फ एक व्यक्ति से हासिल नहीं की जा सकती. कुछ ऐसा ही मानना था धीरूभाई अंबानी का। उनके अनुसार कामयाबी के लिए बेहतर टीम बेहद जरूरी है। किसी भी कंपनी को चलाने के लिए नेतृत्व क्षमता के साथ ही, अच्छी टीम भी महत्वपूर्ण है।

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