आज का इतिहास: 74 साल पहले माउंटबेटन के प्लान को कांग्रेस ने दी थी मंजूरी, इसी से भारत का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान बना

आज का इतिहास: 74 साल पहले माउंटबेटन के प्लान को कांग्रेस ने दी थी मंजूरी, इसी से भारत का बंटवारा हुआ और पाकिस्तान बना

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15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ। इससे एक दिन पहले उसके दो टुकड़े हुए, भारत और पाकिस्तान। बंटवारे के इस फैसले से आज के दिन का भी नाता है। आज ही के दिन ऑल इंडिया कांग्रेस ने माउंटबेटन के बंटवारे के प्लान को मंजूरी दी थी।

ब्रिटिश सत्ता से आजादी के लिए भारत में कई बार आंदोलन हुए। 20वीं सदी की शुरुआत से ये आंदोलन तेजी पकड़ने लगे और इसके साथ ही भारत में सांप्रदायिक दंगे भी होने लगे। आखिरकार ब्रिटिशर्स ने तय किया कि भारत को आजाद कर दिया जाए और इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को सौंपी गई।

माउंटबेटन अप्रैल 1947 में एक योजना लेकर आए, जिसके तहत उन्होंने प्रस्ताव दिया कि भारत के प्रांतों को स्वतंत्र उत्तराधिकारी राज्य घोषित किया जाए और फिर उन्हें यह चुनने की अनुमति दी जाए कि उन्हें संविधान सभा में शामिल होना है या नहीं। इस योजना को ‘डिकी बर्ड प्लान’ कहा गया। माउंटबेटन की इस योजना का खासा विरोध हुआ।

बंटवारे के प्लान पर नेहरू, जिन्ना और बाकी लोगों के साथ चर्चा करते माउंटबेटन।

बंटवारे के प्लान पर नेहरू, जिन्ना और बाकी लोगों के साथ चर्चा करते माउंटबेटन।

जवाहरलाल नेहरू ने कहा कि इससे देश टुकड़ों में बंट जाएगा और अराजकता का माहौल पैदा होगा। माउंटबेटन अब दूसरे प्लान पर काम करने लगे। 3 जून 1947 के दिन माउंटबेटन ने एक और प्लान पेश किया। इस प्लान के मुताबिक भारत को दो अलग हिस्सों में बांटकर दो नए देश बनाए जाएंगे। एक होगा भारत दूसरा पाकिस्तान। साथ ही दोनों देशों का अलग संविधान भी होगा और रियासतों के पास अपनी सुविधा के अनुसार भारत या पाकिस्तान किसी के साथ भी मिल जाने का विकल्प होगा। रियासतें चाहें तो स्वतंत्र भी रह सकती हैं।

माउंटबेटन इस प्लान को कांग्रेस के पास ले गए जिसे आज ही के दिन कांग्रेस ने अपनी मंजूरी दी और इसी के साथ ये तय हो गया कि भारत का बंटवारा होगा। 18 जुलाई 1947 के दिन ब्रिटिश पार्लियामेंट ने भी इस प्लान को पास कर दिया और बंटवारे की तारीख 15 अगस्त तय की गई।

1908: कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज एसोसिएशन की स्थापना

भारत में सबसे पहले बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत हुई थी। उसके बाद अलग-अलग शहरों में स्टॉक एक्सचेंज खुलने लगे। साल 1908 में आज ही के दिन 150 लोगों ने मिलकर कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज एसोसिएशन की स्थापना की थी। हालांकि कोलकाता में इसके पहले भी स्टॉक ट्रेडिंग की जाती थी लेकिन उसके लिए कोई एक निर्धारित जगह और नियम-कानून नहीं थे। ब्रोकर एक नीम के पेड़ के नीचे ट्रेडिंग किया करते थे जिसमें खासी परेशानी आती थी। लिहाजा ब्रोकरों ने तय किया कि ट्रेडिंग के बिजनेस को सुचारु रूप से चलाने के लिए कुछ नियम कायदे और एक स्थायी ठिकाना बनाया जाए।

कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के बाहर भीड़। तस्वीर साल 1945 की है।

कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के बाहर भीड़। तस्वीर साल 1945 की है।

1928 में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज के कामकाज के लिए बिल्डिंग का निर्माण किया गया। इसी बिल्डिंग में ही आज भी एक्सचेंज का सारा कारोबार होता है। आज स्टॉक एक्सचेंज के बोर्ड में 900 से भी ज्यादा सदस्य हैं और 3500 से भी ज्यादा कंपनियां रजिस्टर्ड हैं। 14 अप्रैल 1980 को भारत सरकार ने कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज को स्थायी मान्यता प्रदान की। साल 1997 में कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज ने ट्रेडिंग के पुराने तरीके को बदलते हुए कंप्यूटर के जरिए कामकाज शुरू किया। रजिस्टर्ड कंपनियों के लिहाज से बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के बाद ये देश का दूसरा सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है।

1954: यूरोप के अलग-अलग देशों के फुटबॉल संघ के संगठन UEFA का गठन

आज ही के दिन साल 1954 में UEFA (Union of European Football Associations) का गठन हुआ था। इस संगठन से यूरोप के 55 देशों के फुटबॉल संघ जुड़े हुए हैं। पूरे यूरोप में UEFA हर साल अलग-अलग टूर्नामेंट का आयोजन करता है।

इस संघ की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब तक फीफा वर्ल्ड कप के फाइनल में हर बार कोई न कोई यूरोपियन टीम जरूर पहुंची है। पूरे यूरोप में फुटबॉल के प्रमोशन, डेवलपमेंट और मैनेजमेंट से जुड़े तमाम काम UEFA ही देखता है।

यूरो कप के पहले फाइनल के दौरान यूगोस्लाविया और सोवियत संघ के खिलाड़ी।

यूरो कप के पहले फाइनल के दौरान यूगोस्लाविया और सोवियत संघ के खिलाड़ी।

फिलहाल UEFA के अंडर होने वाले सबसे प्रतिष्ठित यूरो कप टूर्नामेंट का आयोजन हो रहा है। हर 4 साल में होने वाले इस टूर्नामेंट को फुटबॉल के मिनी विश्वकप के नाम से भी जाना जाता है। साल 1960 में इस चैंपियनशिप की शुरुआत की गई थी और पहला फाइनल सोवियत संघ ने जीता था।

आज के दिन को इतिहास में और किन-किन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से याद किया जाता है…

2020: लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों की बीच झड़प हुई।

2014: बतौर प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने अपनी पहली विदेश यात्रा की। मोदी पड़ोसी देश भूटान गए।

2012: निक वालेंडा ने मशहूर नियाग्रा फॉल्स को रस्सी पर चलकर पार किया। ऐसा करने वाले वे पहले शख्स हैं।

2005: भारतीय संसद ने सूचना का अधिकार कानून पास किया। 12 अक्टूबर 2005 से ये कानून लागू हुआ।

1991: राजीव गांधी की हत्या के बाद देश में चुनाव संपन्न हुए। पी वी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने।

1971: ब्रिटेन में मार्गरेट थैचर ने स्कूलों में बच्चों को मुफ्त दिए जाने वाले दूध पर रोक लगाई। उनके इस कदम की काफी आलोचना हुई।

1878: एडवर्ड मायब्रिज ने घोड़े के पैरों के कई फोटोज खींचकर ये सिद्ध किया कि दौड़ते हुए एक ही समय पर घोड़े के चारों पैर हवा में होते हैं।

1785: दो फ्रेंच बलूनिस्ट हॉट एयर बलून से इंग्लिश चैनल को पार करने की कोशिश कर रहे थे तभी उनके बलून में विस्फोट हो गया और दोनों मारे गए। हॉट एयर बलून से हुई ये पहली दुर्घटना थी।

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