शवदान में जयपुर से आगे सूरत: एसएमएस हॉस्पिटल में सालभर में 12 शवों का दान, यहां सिविल-स्मीमेर में 42 रखे हुए

शवदान में जयपुर से आगे सूरत: एसएमएस हॉस्पिटल में सालभर में 12 शवों का दान, यहां सिविल-स्मीमेर में 42 रखे हुए

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सूरत शवदान में राजस्थान के जयपुर से आगे है। यहां सिविल और स्मीमेर अस्पताल में 44 शव पड़े हुए हैं, जबकि जयपुर के 750 सीटों वाले एसएमएस अस्पताल में सालाना 10 से 12 शव ही डोनेट होते हैं। इस मेडिकल कॉलेज में एक शव का रिसेक्शन करीब 100 छात्र करते हैं। सूरत के सिविल और स्मीमेर अस्पताल में एमबीबीएस के 450 छात्र हैं। सिविल के एनाटोमी विभाग में 8 और स्मीमेर में 36 शव स्टोर किए गए हैं।

कोरोना काल के 14 महीनों में 40 से अधिक शव दान के लिए आवेदन आए। दोनों अस्पतालों ने यह कहते हुए मना कर दिया कि पहले से ही जरूरत से अधिक शव पड़े हैं। अब स्टोरेज की व्यवस्था नहीं है। स्मीमेर मेडिकल कॉलेज के एनोटॉमी विभाग की एचओडी डॉ. दीपा गुप्ता ने बताया कि शवदान में सूरत सबसे आगे है। यहां शवदान के प्रति लोग जागरूक हैं। मैं देश के कई राज्यों में इंस्पेक्शन के लिए जाती हूं। कई राज्यों में 100 से 150 छात्रों पर एक शव रिसेक्शन के लिए मिलता है। अभी कोरोना के कारण हम देह दान स्वीकार नहीं कर रहे हैं।

इनका होता है देहदान

  • मौत प्राकृतिक होनी चाहिए
  • मौत के महज छह घंटे के अंदर देह दान करना होगा
  • सैप्टिक, कैंसर, एचआईवी, एक्सीडेंटियल, विकलांग आदि का देहदान नहीं होता
  • मेडिको लीगल केस वाली बॉडी का भी देहदान नहीं होता
  • 80 से 90 किलो से अधिक शव का देहदान नहीं होता
  • डॉक्टर द्वारा कॉज ऑफ डेथ होना जरूरी है

कोरोना से रिसेक्शन नहीं कर पाए एमबीबीएस छात्र

कोरोना पिछले 14 माह से है। इसके कारण मेडिकल छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। पिछले 14 माह से एमबीबीएस के छात्रों पढ़ाई नहीं हो पा रही है। ये छात्र एनोटॉमी विभाग में शरीर की रचना भी नहीं जान और सिख पा रहे हैं। हालांकि स्मीमेर में गुरुवार से पढ़ाई शुरू होगी। डॉ. दीपा ने बताया कि एनोटॉमी विभाग छात्रों के लिए गुरुवार से खुल रहा है।

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