फैसला आज: 45 लाख की जमीन की जांच पर खर्च किए 21 लाख अभी भी 50 बैठक के लिए 50 लाख मांग रही कमेटी

फैसला आज: 45 लाख की जमीन की जांच पर खर्च किए 21 लाख अभी भी 50 बैठक के लिए 50 लाख मांग रही कमेटी

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कोसाड में बने ईडब्लूएस आवास की निजी जमीनों के मामले पर अब भी जांच चल रही।

  • स्थायी समिति की बैठक में निर्णय लेंगे कि जांच कमेटी के काम को आगे बढ़ाएं या नहीं
  • कोसाड़: निजी जमीन पर EWS आवास बनाने का 11 साल पुराना केस
  • दो कमेटियां कर चुकी थी जांच, संतुष्ट नहीं हुए तो तीसरी को साैंपी

कोसाड में ईडब्ल्यूएस आवास में जमीन की गड़बड़ी के मामले की जांच के लिए बनी कमेटी को आगे बढ़ाने या नहीं बढ़ाने के प्रस्ताव पर गुरुवार मनपा की स्थायी समिति में चर्चा होगी। कोसाड आवास में 45 लाख की निजी जमीन के मामले की जांच कर रही कमेटी पर मनपा अब तक 21.53 लाख रुपए खर्च कर चुकी है।

कमेटी को 2017 में ही जांच छह माह में पूरी करनी थी, लेकिन अभी नहीं हो पाई। कमेटी जांच आगे बढ़ाने के लिए 50 लाख रुपए और मांग रही है। इस तरह अगर मनपा कमेटी के काम को आगे बढ़ाती है तो उसे 45 लाख रुपए की जमीन के पीछे 70 लाख रुपए से ज्यादा खर्च करने पड़ेंगे। यही नहीं वर्तमान कमेटी से पहले भी इसी मामले की जांच के लिए दो कमेटियां बनाई जा चुकी हैं। उन पर कितना खर्च हो चुका है यह मनपा नहीं बता रही है।

हैरान करने वाली बात यह भी है कि जमीन के जिन 12 ब्लॉक का यह मामला है उनके मालिकों को 42 लाख रुपए की जमीन वर्ष 2015 में ही दे दी गई थी। प्रभावित इस पर संतुष्ट हो गए थे। जमीन संपादन के इस मामले में स्थायी समिति का निर्णय मनपा को भारी पड़ रहा है। जिस समय यह मामला सामने आया था उस समय तीन अधिकारियों का तबादला भी कर दिया गया था।

यह है मामला: 21792 वर्गमीटर निजी जमीन के 12 ब्लॉक पर बना दिए 1776 आवास

मनपा ने वर्ष 2009 में कोसाड में गुजरात हाउसिंग बोर्ड से 11.98 लाख वर्गमीटर जमीन जमीन ली थी। इसके बीच में आ रही 21792 वर्गमीटर जमीन के 12 ब्लाॅक निजी थे। इन के मालिकों से बिना बात किए ही 1776 आवास बना दिए गए। 21792 वर्गमीटर जमीन में 912/1, 971/1, 973/1, 1006/1, 1007/1, 1011/1, 1017/1, 1018/1, 2025/1, 2027/1, 2031/1 और 2032/1 ब्लाॅक तीन किसानों के थे।

निर्माण के दाैरान निजी जमीन के मालिक तीनों किसान अपने कागजात लेकर मनपा के पास पहुंच गए। उसके बाद अधिकारियों की गलती का खुलासा हुअा। बाद में मनपा ने तीनों किसानों से बातकर मामले को सुलझाया और उन्हें 10896 वर्गमीटर जमीन अमरोली के पास दे दी।

जांच कमेटी के 3 सदस्यों को प्रति बैठक 35-35 हजार

कोसाड आवास में निजी जमीन के मामले की जांच करने के लिए वर्ष 2017 में कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी के सदस्य अहमदाबाद की सेवानिवृत्त जज ज्योत्सना याज्ञनिक, जीके उपाध्याय और स्केट काॅलेज के प्रोफेसर भास्कर भट्ट हैं। कमेटी की प्रति बैठक के लिए निवृत्त जजों को 35-35 हजार, जबकि प्रोफेसर को करीब 20 हजार रुपए चुकाने पड़ते हैं। कमेटी अब तक 22 बैठक कर चुकी है, लेकिन जांच अधूरी है।

दो जांच में अधिकारी के खिलाफ कुछ नहीं मिला तो तीसरी कमेटी बनाई

वर्तमान कमेटी को जांच सौंपने से पहले भी 2 जांच कमेटियां बनाई जा चुकी हैं। वर्ष 2012 में असेसमेंट किया गया थी। सिटी इंजीनियर, डिप्टी कमिश्नर फाइनेंस और वीआईओ ने जांच की थी। उसके बाद 2017 में सेवानिवृत जज डुमसिया ने जांच कर रिपोर्ट दी थी। सूत्रों की मानें तो इस जांच में अधिकारी के खिलाफ कुछ हाथ नहीं लगा था।

जांच से असंतुष्ट स्थायी समिति ने 2017 में ही 2 सेवानिवृत जजों और स्केट कॉलेज के प्रोफेसर सहित 3 सदस्यीय कमेटी को जांच साैंप दी। 22 मीटिंग में 21.53 लाख रुपए खर्च करने के बाद 12 जनवरी 2018 में कमेटी ने मनपा कमिश्नर से कहा कि आगे की जांच के लिए 8 महीने और लगेंगे। 50 मीटिंग की जाएगी, जिन पर लगभग 50 लाख रुपए खर्च होंगे।

1986-91 के डेवलपमेंट प्लान में रास्ता नहीं बताया था

मनपा ने गुजरात हाउसिंग बोर्ड से जमीन लेकर वर्ष 2007 में आवास का निर्माण शुरू किया। निर्माण के दाैरान 12 ब्लॉक को लेकर आपत्ति जताई गई। गुजरात हाउसिंग बोर्ड ने जमीन का संपादन नहीं किया था। 1986-91 डेवलपमेंट प्लान में रास्ता नहीं बताया गया था। उसके बाद 1996 और 2004 के रिवाइज नक्शे में भी रास्ता नहीं बताया गया।

जब निर्माण कार्य शुरू किया तो निजी जमीन मालिक अपने कागजात लेकर पहुंच गए। जांच कमेटी नियुक्त करने पहले ही मनपा ने किसानों से 50 फीसदी जमीन पर समझाैता किया और वर्ष 2015 में 42 लाख रुपए की 10896 वर्गमीटर जमीन कोसाड आवास के नजदीक ही दे दी। यह जमीन गुजरात हाउसिंग बोर्ड से ली थी। 3 अधिकारियों का तबादला कर दिया गया था।

बैठक में इस फिजूल खर्ची पर लगाया जाएगा पूर्ण विराम

अनावश्यक खर्च पर अंकुश लगाना जरूरी है। अब हम कोसाड आवास मामले में बनी कमेटी के काम को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। इस मामले में कमेटी ने अब तक जो जांच की है उसी के मुताबिक रिपोर्ट तैयार करने का प्रयास किया जाएगा। -परेश पटेल, अध्यक्ष, स्थायी समिति

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