आज का इतिहास: 35 साल पहले भारत को लॉर्ड्स में मिली थी पहली टेस्ट जीत, उसके बाद यहां सिर्फ एक टेस्ट और जीत सकी टीम इंडिया

आज का इतिहास: 35 साल पहले भारत को लॉर्ड्स में मिली थी पहली टेस्ट जीत, उसके बाद यहां सिर्फ एक टेस्ट और जीत सकी टीम इंडिया

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1986 में आज ही के दिन भारत को इंग्लैंड के ऐतिहासिक लॉर्ड्स ग्राउंड पर पहली बार टेस्ट मैच में जीत मिली थी। भारतीय कप्तान कपिल देव ने आखिरी गेंद पर छक्का मारकर ये ऐतिहासिक जीत दिलाई थी। इससे पहले लॉर्ड्स पर खेले गए 10 मैचों में से भारत को 8 में हार मिली और 2 ड्रॉ हुए थे।

भारत ने इस सीरीज से पहले विदेशी धरती पर कुल 105 टेस्ट मैच खेले थे जिनमें से 51 मैच टीम हार चुकी थी, 44 ड्रॉ हुए थे और केवल 10 मैचों में ही भारतीय टीम को जीत मिली थी।

भारतीय टीम ने बैटिंग और बॉलिंग का बढ़िया कॉम्बिनेशन मैदान में उतारा था। कपिल देव की कप्तानी में रोजर बिन्नी, चेतन शर्मा, मोहिंदर अमरनाथ, रवि शास्त्री, मनिंदर सिंह, सुनील गावस्कर, कृष्णामचारी श्रीकांत, दिलीप वेंगसरकर, मोहम्मद अजहरुद्दीन जैसे खिलाड़ी मैदान में थे।

कपिल देव ने टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का फैसला लिया। इंग्लैंड ने पहले विकेट के लिए 66 रनों की साझेदारी की। भारत को पहला विकेट टिम रॉबिनसन के रूप में मनिंदर सिंह ने दिलवाया। इसके बाद विकेट्स की लाइन लग गई। 66 रनों पर जहां इंग्लैंड का एक विकेट गिरा था, वहीं 92 रनों तक आते-आते इंग्लैंड के 4 खिलाड़ी मैदान से लौट चुके थे। उसके बाद मैदान पर आए गूच ने पारी को संभालते हुए 255 गेंदों में शतक जड़ा। टेस्ट करियर में ये गूच का छठा शतक था। गूच 114 रन बनाकर आउट हुए और पहले दिन का खेल खत्म होने पर इंग्लैंड के खाते में 5 विकेट के नुकसान पर 245 रन थे।

अगले दिन भारतीय बॉलर्स ने सटीक गेंदबाजी की। 33 ओवरों में इंग्लैंड की टीम केवल 49 रन ही बना पाई और टीम का स्कोर 294 रहा। चेतन शर्मा ने 5 और बिन्नी ने 3 विकेट लिए। भारत ने पहली इनिंग में इंग्लैंड पर 47 रनों की बढ़त ले ली। दिलीप वेंगसरकर ने 213 गेंदों पर शानदार 126 रन बनाए।

अपनी पारी के दौरान शॉट लगाते कपिल देव।

अपनी पारी के दौरान शॉट लगाते कपिल देव।

इंग्लैंड की दूसरी पारी में कपिल देव ने घातक गेंदबाजी करते हुए शुरुआत में ही 3 विकेट झटके। इंग्लैंड का स्कोर 35 रन पर 3 विकेट था। चौथे विकेट के लिए एलन लैम्ब और माइक गैटिंग के बीच 73 रनों की साझेदारी हुई। भारतीय बॉलर्स की सधी हुई बॉलिंग के आगे इंग्लैंड की टीम के केवल 3 खिलाड़ी ही 20 से ज्यादा रन बना सके। पूरी टीम 180 रन ही बना सकी। कपिल देव ने 4 और मनिंदर ने 3 विकेट लिए।

भारत को अब जीतने के लिए 134 रनों की दरकार थी। भारत की तरफ से ओपनिंग करने उतरे श्रीकांत 0 पर आउट हो गए। उसके बाद गावस्कर भी चलते बने और भारत का स्कोर 2 विकेट के नुकसान पर 31 रन था।

इसके बाद अमरनाथ और वेंगसरकर ने पारी संभालने की कोशिश की, लेकिन ये साझेदारी बड़ी पारी में तब्दील नहीं हो सकी। भारत ने 78 रन पर 4 विकेट खो दिए। भारत जीत से 24 रन दूर था तभी अजहरुद्दीन भी आउट हो गए। इसके बाद कप्तान कपिल देव और रवि शास्त्री मैदान पर थे। कपिल ने 4 चौके और 1 छक्के की मदद से 10 गेंदों में 23 रन जड़े। फिल एडमंड्स के ओवर में कपिल देव 3 चौके जड़ चुके थे और आखिरी गेंद पर कपिल देव ने जोरदार छक्का मारा। भारत मैच जीत चुका था। बतौर कप्तान कपिल देव और लॉर्ड्स के ग्राउंड पर भारतीय टीम की ये पहली जीत थी।

सलेम में जिस जगह "चुड़ैलों" को फांसी दी गई थी, उस जगह पर उनकी याद में एक म्यूजियम और मेमोरियल बनाया गया।

सलेम में जिस जगह “चुड़ैलों” को फांसी दी गई थी, उस जगह पर उनकी याद में एक म्यूजियम और मेमोरियल बनाया गया।

1692: पहली ‘चुड़ैल’ को दी गई थी फांसी

अमेरिका के मैसाचुसेट्स के सलेम नाम के एक गांव में फरवरी 1692 में कई युवा लड़कियों में अजीब बीमारियां सामने आने लगीं। इन लड़कियों का मानना था कि उन पर किसी ने जादू-टोना करवा दिया है और वे किसी चुड़ैल के वश में हैं। उन्होंने स्थानीय महिलाओं पर आरोप लगाया कि ये जादू-टोना उन्होंने ही करवाया है। इन महिलाओं को सजा दिलवाने के लिए लड़कियों ने कोर्ट में मामला दायर किया। कोर्ट में सुनवाई हुई और 1 मार्च 1692 को 3 महिलाओं पर जादू-टोने करने का आरोप साबित हुआ। इनमें से एक महिला ने कोर्ट में कहा कि वो जादू-टोना करने वाले बाकी लोगों को पकड़ने में पुलिस की मदद करेगी। अगले कुछ महीनों में पुलिस ने इस महिला की मदद से सलेम गांव के करीब 150 लोगों को जादू-टोना करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया जिनमें 4 साल का एक छोटा बच्चा भी शामिल था।

जून में आरोपियों पर मुकदमे की शुरुआत हुई। सबसे पहला मुकदमा ब्रिजेट बिशप नामक महिला पर चलाया गया। ब्रिजेट पर सबसे ज्यादा लोगों ने जादू-टोने का आरोप लगाया था। आज ही के दिन ब्रिजेट को फांसी दी गई। पूरे मामले में 18 और लोगों को फांसी दी गई। इस घटना को सलेम चुड़ैल परीक्षण नाम से जाना जाता है।

1890: संडे बना था हॉलिडे

संडे यानी छुट्टी। बैंक, स्कूल, ऑफिस सब बंद और दिनभर की फुर्सत। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि संडे के दिन सब कुछ बंद रखने की शुरुआत कब हुई थी? इस सवाल का जवाब है – 131 साल पहले आज ही के दिन। 10 जून 1890 को ब्रिटिशर्स ने संडे को छुट्टी की घोषणा की थी। इससे पहले हफ्ते के सातों दिन काम करना पड़ता था।

ईसाई लोगों के लिए संडे का दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है। इस दिन ईसाई लोग चर्च में जाकर प्रार्थना करते हैं। इसी वजह से ब्रिटिश लोग संडे के दिन कामकाज नहीं करते थे, लेकिन भारतीयों को काम करना पड़ता था। धीरे-धीरे कपड़ा मिल में काम करने वाले भारतीय मजदूरों में भी ये मांग उठने लगी कि उन्हें भी हफ्ते में एक दिन काम से छुट्टी दी जाए।

मजदूरों की इस मांग को ब्रिटिशर्स तक पहुंचाने की जिम्मेदारी नारायण मेघाजी लोखंडे को मिली। 1881 में उन्होंने ब्रिटिश सरकार को एक आवेदन सौंपा। इस आवेदन में मजदूरों के काम करने के घंटे कम करने और संडे को छुट्टी देने जैसी मांगे थीं।

3 मई 2005 को नारायण मेघाजी लोखंडे के नाम से डाक टिकट जारी किया गया।

3 मई 2005 को नारायण मेघाजी लोखंडे के नाम से डाक टिकट जारी किया गया।

अगले 7 सालों तक मजदूरों की मांग को लेकर लोखंडे और अंग्रेजों की बीच बातचीत चलती रही। आखिरकार आज ही के दिन ब्रिटिशर्स ने लोखंडे की मांग मान ली और इसी के साथ हमें भी हफ्ते में एक दिन आराम करने की सुविधा मिली।

10 जून के दिन को इतिहास में इन महत्वपूर्ण घटनाओं की वजह से भी याद किया जाता है…

2019: लंबी बीमारी के बाद अभिनेता, निर्देशक और लेखक गिरीश कर्नाड का निधन हो गया।

1977: एपल ने एपल-2 नाम से कंप्यूटर लॉन्च किया। यह आम लोगों के लिए एपल का बनाया हुआ पहला प्रोडक्ट था।

1971: अमेरिका ने चीन पर लगे 21 साल पुराने व्यापार प्रतिबंध को खत्म कर दिया।

1967: इजराइल और अरब देशों के बीच 6 दिन के युद्ध का अंत हुआ।

1946: राजशाही खत्म होने के बाद इटली गणतांत्रिक राष्ट्र बना।

1935: दो दोस्त बिल बिलस्न और रॉबर्ट स्मिथ ने मिलकर Alcoholics Anonymous नाम से एक ग्रुप बनाया था। शराब की लत छुड़वाने के लिए बने इस ग्रुप में आज कई देशों के लाखों लोग शामिल हैं।

1752: बेंजामिन फ्रैंकलिन ने आकाशीय बिजली और विद्युत में संबंध पता करने के लिए पतंग को लोहे के तार से बांधकर उड़ाया।

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