विवादित मुद्दे पर स्थायी समिति में कल होगा निर्णय: 6 माह में जांच पूरी करनी थी, कमेटी ने 22 बैठकें कर 21.53 लाख खर्च किए, पर रिपोर्ट नहीं बनी

विवादित मुद्दे पर स्थायी समिति में कल होगा निर्णय: 6 माह में जांच पूरी करनी थी, कमेटी ने 22 बैठकें कर 21.53 लाख खर्च किए, पर रिपोर्ट नहीं बनी

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  • 11 साल पहले कोसाड में निजी जमीन पर ईडब्ल्यूएस आवास बनाने के मामले पर होगी चर्चा

मनपा ने कोसाड में गुजरात हाउसिंग बोर्ड से जमीन लेकर ईडब्ल्यूएस आवास बनाए थे। इसमें कुछ जमीन निजी मालिकों की है। 11 साल बाद ये मुद्दा फिर से चर्चा में है। इसकी जांच के लिए बनी रिटायर्ड जज समेत 3 सदस्यों की कमेटी को 6 माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपनी थी। वर्ष 2017 में कमेटी ने 6 माह में 22 बैठकें कर 21.53 लाख रुपए खर्च कर दिए, लेकिन जांच पूरी नहीं हुई।

जनवरी 2018 में कमेटी ने मनपा कमिश्नर से मुलाकात करके कहा था कि केस की जांच करके रिपोर्ट तैयार करने में 8 महीने का समय और लगेगा। इसके लिए 40 से 50 बैठकें होंगी। कमेटी ने कहा था प्रति बैठक पर 1 लाख के हिसाब से कुल 50 लाख रुपए खर्च होंगे।

कमेटी ने कहा था कि इसके अलावा 10-15 बैठकें रिपोर्ट तैयार करने के लिए होंगी, इस दौरान चार्ज नहीं लिया जाएगा। वर्ष-2018 में विजिलेंस एंड इंस्पेक्टशन विभाग ने 50 बैठकों के लिए स्थायी समिति से मंजूरी मांगी थी। इसके बाद इसे पेंडिंग रख दिया गया था। अब इस फाइल से धूल हटाकर इसे स्थायी समिति में पेश किया गया है। गुरुवार को होने वाली स्थायी समिति की बैठक में इस पर निर्णय होगा।

यह है मामला

कोसाड आवास में हुई धांधली वर्ष 2009 में सामने आई थी। विवाद बढ़ने के बाद 2015 में स्थायी समिति में दो रिटायर्ड जज और एक विशेषज्ञ की कमेटी बनाने का प्रस्ताव पेश किया गया था। अहमदाबाद के रिटायर्ड जज जीजे उपाध्याय, डॉ. ज्योत्सनाबेन याज्ञिक, स्केट कॉलेज के असि. प्रोफेसर भास्कर भट्‌ट की जांच कमेटी गठित की गई थी।

21 जून 2017 को कमेटी का कार्यकाल पूरा हो गया था। 12 जनवरी 2018 को कमेटी ने मनपा कमिश्नर से कहा कि रिपोर्ट तैयार करने में 8 माह लगेंगे। इसके लिए 50 बैठकों पर 50 लाख खर्च होंगे। पूरे मामले में तत्कालीन टाउन प्लानर डीएन बसाक के खिलाफ आरोप लगे हैं, जो अब कार्यपालक इंजीनियर हैं।

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