बंद होने की कगार पर गुजरात के PG: हर महीने 45 करोड़ रु. का नुकसान, किराया निकालना तक हो रहा मुश्किल; सालों से PG चला रहे लोग करने लगे दूसरा काम

बंद होने की कगार पर गुजरात के PG: हर महीने 45 करोड़ रु. का नुकसान, किराया निकालना तक हो रहा मुश्किल; सालों से PG चला रहे लोग करने लगे दूसरा काम

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कोरोना के कारण पिछले एक साल से स्कूल-कॉलेज बंद होने से पीजी संचालकों की हालत खराब हो गई है। पहली बार अहमदाबाद और वडोदरा जैसे बड़े शहर में पीजी चलाने वालों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

अहमदाबाद में पीजी सेंटर चलाने वाले यश शाह बताते हैं कि शहर में 3 हजार से ज्यादा और वडोदरा में 500 से ज्यादा पीजी सेंटर्स हैं। जिनमें से अब तीन-चार सौ ही चालू हैं। इससे संचालकों को हर महीने के 50 हजार से लेकर 2 लाख रुपए तक का नुकसान हो रहा है।

मान लिया जाए कि अहमदाबाद के 2,600 पीजी सेंटर और वडोदरा के 400 सेंटर्स को 1.5 लाख रुपए का हर महीने भी नुकसान हो रहा है तो ये आंकड़ा 45 करोड़ रुपए पहुंच जाता है। ज्यादातर पीजी-ऑपरेटर फ्लैट, बंगला या कई मामलों में बिल्डिंग किराए पर लेकर पीजी सेवा चलाते हैं। इनका किराया 30,000 से लेकर 70,000 रुपए तक होता है।

घाटा होने के बाद कई संचालकों ने दूसरे बिजनेस की तरफ रूख कर लिया है।

जो चल रहे, उनमें भी गिनती के स्टूडेंट्स
अहमदाबाद में फिलहाल 20 से 25 फीसदी ही पीजी चल रहे हैं और उनमें भी स्टूडेंट्स गिनती के ही हैं, जिससे संचालकों को सेंटर्स का किराया निकालना तक भारी पड़ रहा है। वहीं, मौजूदा हालात में इस साल भी संचालकों को राहत मिलने की उम्मीद कम ही है।

70 फीसदी सेंटर खाली
अहमदाबाद में 14 साल से पीजी चला रहे कार्तिक मोदी का कहना है कि शहर के करीब 70 फीसदी पीजी संचालकों के पीजी सेंटर्स खाली हो चुके हैं। फिलहाल वे हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं। कुछ संचालकों ने दूसरे व्यवसायों की ओर रुख कर लिया है। वहीं कईयों ने सब्जी व किराने का व्यवसाय शुरू कर लिया है। बता दें, अहमदाबाद में अलग-अलग शहरों या जिलों से करीब 3 लाख छात्र पढ़ने आते हैं।

इस साल भी पीजी व हॉस्टल संचालकों को राहत मिलने की उम्मीद कम ही है।

इस साल भी पीजी व हॉस्टल संचालकों को राहत मिलने की उम्मीद कम ही है।

वडोदरा में भी संचालकों को नुकसान
इसी तरह वडोदरा में पीजी सेंटर चलाने वाले राकेश पंजाबी कहते हैं कि वडोदरा में एमएस यूनिवर्सिटी के अलावा कई निजी कॉलेज होने के चलते यहां पीजी व हॉस्टल्स की भारी डिमांड है। शहर में करीब 500 पीजी हैं।

वहीं, शहर का वाघोडिया और फतेहगंज इलाका तो पीजी सेंटर्स के रूप में ही पहचाना जाता है। फिलहाल सभी में ताला लगा हुआ है और आने वाले कुछ महीनों तक यही हाल रहने वाला है। इसके अलावा कोरोना के चलते अब कई स्टूडेंट्स को एक कमरे में सीमित नहीं किया जा सकेगा। इससे पीजी सेंटर्स में कम स्टूडेंट्स ही रहने से भी नुकसान उठाना पड़ेगा।

वर्क फ्रॉम होम के चलते कई ऑफिसों में आधा स्टाफ आने का असर भी पीजी सेंटर्स पर पड़ा है।

वर्क फ्रॉम होम के चलते कई ऑफिसों में आधा स्टाफ आने का असर भी पीजी सेंटर्स पर पड़ा है।

किराए में 10-15% की कमी
अहमदाबाद के न्यू एज रियलिटी के चेतन सावलिया के बताए अनुसार, स्कूल-कॉलेज खुलने के बाद भी कम ही संख्या में स्टूडेंट्स शहर आएंगे। वहीं, सेफ्टी के नजरिए से ज्यादातर सेपरेट किराए का मकान लेना पसंद करेंगे। इससे पीजी सेंटर्स के किराए में 10 से 15 फीसदी की गिरावट आना तय है।

वर्क फ्रॉम होम के चलते भी नुकसान
मिनी लॉकडाउन के चलते ज्यादातर ऑफिसों में वर्क फ्रॉम होम चल रहा है। इसका असर भी पीजी सेंटर्स पर पड़ा है। क्योंकि स्टूडेंट्स के अलावा पीजी सेंटर्स में कामकाजी लोगों की भी भरमार रहती है। ज्यादातर बड़े शहरों में आसपास के लोग नौकरी करने आते हैं और वे सुविधा के लिए पीजी में रहना ही पसंद करते हैं। पिछले साल से कई ऑफिसों में आधा स्टाफ ही आ रहा है। इसका सीधा असर भी पीजी सेंटर्स पर पड़ा है।

 

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