वैक्सीन पासपोर्ट: कोवैक्सिन लगवाने वाले सितंबर से विदेश जा सकेंगे; WHO समेत 60 से ज्यादा देशों में इमरजेंसी यूज के लिए अप्रूवल जल्द मिलने की उम्मीद

वैक्सीन पासपोर्ट: कोवैक्सिन लगवाने वाले सितंबर से विदेश जा सकेंगे; WHO समेत 60 से ज्यादा देशों में इमरजेंसी यूज के लिए अप्रूवल जल्द मिलने की उम्मीद

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हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने संकेत दिए थे कि G-7 सम्मेलन के दौरान वैक्सीन पासपोर्ट को लेकर सहमति बनाने की कोशिश की जा सकती है।

भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन कोवैक्सिन को जुलाई से सितंबर के बीच वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) से इमरजेंसी यूज की मंजूरी मिल सकती है। इसे बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक इसके लिए WHO में अप्लाई कर चुकी है। अगर ऐसा होता है, तो सितंबर से कोवैक्सिन लगवा चुके लोग भी विदेश यात्रा कर सकेंगे। कंपनी ने बताया कि 60 देशों में कोवैक्सिन के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल्स की प्रॉसेस चल रही है। इनमें कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित अमेरिका और ब्राजील भी शामिल हैं।

अब तक 13 देशों में मंजूरी मिल चुकी
कंपनी ने बताया कि अप्रूवल के लिए WHO-जिनेवा में एप्लीकेशन दी गई है। कोवैक्सिन को अब तक 13 देशों में मंजूरी मिल चुकी है। ज्यादातर देश अपने यहां आ रहे लोगों के वैक्सीनेशन पर जोर दे रहे हैं। जिन्हें टीका नहीं लगा है, उनके लिए RT-PCR टेस्ट की निगेटिव रिपोर्ट के साथ यात्रा कर सकते हैं।

वैक्सीन पासपोर्ट की चर्चा के बीच बहस शुरू

  • हाल ही में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने संकेत दिए थे कि G-7 सम्मेलन के दौरान वैक्सीन पासपोर्ट को लेकर सहमति बनाने की कोशिश की जा सकती है। उनका प्रस्ताव इंटरनेशनल ट्रैवल को आसान बनाने का है, लेकिन इसमें अभी कई समस्याएं हैं। कई देश ऐसे भी हैं जहां पर अभी मैन्युफैक्चरिंग या फिर अन्य समस्याओं की वजह से वैक्सीनेशन पूरी रफ्तार नहीं पकड़ सका है।
  • इसमें कोवैक्सिन की बात इसलिए की जा रही है, क्योंकि इसे अब तब WHO ने अप्रूव नहीं किया है। विदेशी यूनिवर्सिटी और कई देशों ने ऐसे नियम बनाएं हैं कि WHO से अप्रूव वैक्सीन लगवा चुके लोगों को बिना पाबंदियों के विदेश यात्रा करने की छूट होगी। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित विदेशी यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले वे बच्चे होंगे, जिन्होंने भारत में कोवैक्सिन लगवाई है।
यह फोटो कुल्लू की है। यहां 18 से 44 साल के लोगों का वैक्सीनेशन तेजी से चल रहा है।

यह फोटो कुल्लू की है। यहां 18 से 44 साल के लोगों का वैक्सीनेशन तेजी से चल रहा है।

HO के इमरजेंसी यूज अप्रूवल का क्या महत्व है?

  • WHO की इमरजेंसी यूज लिस्टिंग में महामारी जैसी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी में हेल्थ प्रोडक्ट की सेफ्टी और इफेक्टिवनेस को जांचा जाता है। WHO ने फाइजर की वैक्सीन को 31 दिसंबर 2020 को, ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को 15 फरवरी 2021 को और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को 12 मार्च को इमरजेंसी यूज अप्रूवल दिया था।
  • WHO के मुताबिक इमरजेंसी स्थिति को देखते हुए जल्द से जल्द दवा, वैक्सीन और डायग्नोस्टिक टूल्स विकसित करना और अप्रूव करना जरूरी है। वह भी सेफ्टी, एफिकेसी और क्वालिटी के मानकों पर खरा रहते हुए। यह असेसमेंट महामारी के दौरान व्यापक स्तर पर लोगों के लिए इन प्रोडक्ट्स की उपयोगिता सुनिश्चित करता है।

कोवीशील्ड के लिए केंद्र ने बदला नियम
इससे पहले केंद्र सरकार ने सोमवार को विदेश जाने वाले लोगों के लिए वैक्सीनेशन को लेकर नई गाइडलाइन जारी की थी। नए SOP के तहत विदेश में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स 28 दिन के बाद कभी भी कोवीशील्ड की दूसरी डोज ले सकेंगे। इससे पहले यह नियम 84 दिन यानी (12- 16 हफ्ते) का था। देश में रहने वाले लोगों के लिए यह नियम लागू नहीं होगा।

यह नियम 31 अगस्त तक विदेश जाने वालों के लिए
केंद्र की नई गाइडलाइन के मुताबिक, विदेश यात्रा के लिए सिर्फ कोवीशील्ड वैक्सीन लेने वालों को ही वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट दिया जाएगा। वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट पर पासपोर्ट नंबर का जिक्र अनिवार्य होगा। ये सुविधा 18 साल से ऊपर के उन लोगों के लिए है जो 31 अगस्त तक विदेश यात्रा करना चाहते हैं। विदेश यात्रा करने वालों को लेकर जल्द ही ये विशेष व्यवस्था CoWIN प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध होगी।

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