म्यूजिक थैरेपी का कमाल: 60 सालों तक ‘वॉइस ऑफ रफी’ बने रहे कलाकार की कोरोना में याददाश्त चली गई, रफी के गाने सुनाकर बेटी याददाश्त वापस ले आई

म्यूजिक थैरेपी का कमाल: 60 सालों तक ‘वॉइस ऑफ रफी’ बने रहे कलाकार की कोरोना में याददाश्त चली गई, रफी के गाने सुनाकर बेटी याददाश्त वापस ले आई

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तुलसीदास की कोरोना के इलाज के दौरान चली गई थी याददाश्त।

संगीत हमारे मनोरंजन का साधन होने के साथ ही मानसिक सेहत का भी भरपूर ख्याल रखने में कितना सक्षम है। इसका उदाहरण राजकोट के 60 वर्षीय तुलसीदास सोनी से लिया जा सकता है, जिनकी म्यूजिक थैरेपी से याददाश्त वापस आ गई। इतना ही नहीं, तुलसीदास अब कोरोना महामारी की गिरफ्त से भी धीरे-धीरे बाहर आ रहे हैं।

फेफड़ों में 50 फीसदी इंफेक्शन हो गया था
दरअसल तुलसीदास की 15 अप्रैल को कोरोना रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी। जांच करने पर पता चला कि उनके फेफड़ों में 50 फीसदी इंफेक्शन हो गया है। इलाज के दौरान वे एक बार बेहोश हो गए थे और इस दौरान उनकी याददाश्त चली गई थी। वे परिवार में किसी को पहचान नहीं पा रहे थे। इसके चलते बेटी भावनाबेन ने म्युजिक थैरेपी का सहारा लिया और उन्हें मोबाइल पर मोहम्मद रफी के गाने सुनाए। कुछ दिनों बाद भावनाबेन ने उनसे पूछा कि यह गीत आपको याद है तो तुलसीदास ने वही गाना गाते हुए अपने होंठ हिला दिए।

अजमेर में एक स्टेज पर मो. रफी का गीत गाते हुए तुलसीदास की फाइल फोटो।

अजमेर में एक स्टेज पर मो. रफी का गीत गाते हुए तुलसीदास की फाइल फोटो।

रफी के गीत गाते थे
तुलसीदास की बेटी ने म्युजिक थैरेपी का सहारा इसलिए लिया, क्योंकि तुलसीदास को गाने का बहुत शौक था। उन्होंने कई सालों तक स्टेज शो किए और मो. रफी के गाने गाकर लोगों का मनोरंजन किया। वे बिल्कुल रफी की आवाज में गीत गाते थे। उन्होंने गुजरात के अलावा देश के कई शहरों में स्टेज पर रफी के गीत सुनाकर लोगों का मनोरंजन किया।

पापा अब ठीक होने लगे हैं : भावनाबेन
इस बारे में भावनाबेन ने बताया कि पापा को म्युजिक से सिर्फ लगाव नहीं है, बल्कि वह तो उनकी जिंदगी है। इसी के चलते उनकी याददाश्त जाने पर मुझे म्युजिक थैरेपी की बात याद आई। तभी ख्याल आया कि पापा मो. रफी के फैन हैं और सिर्फ उन्हीं के गाए गीत गाया करते थे। इसलिए मैंने उन्हें कई दिनों तक रफी साहब के कई गाने सुनाए और पापा की याददाश्त वापस आ गई। वहीं, पापा कोरोना से भी अब ठीक हो रहे हैं।

मेरे बेटे को म्युजिक थैरेपी से ठीक किया था पापा ने
भावनाबेन बताती हैं कि एक बार मेरा 3 साल का बेटा बीमार हो गया था। उसका बुखार दिमाग पर आ गया था। इसके चलते उसकी बोलने की शक्ति कमजोर होने लगी थी। तब पिताजी ने उसे भी लंबे समय तक म्युजिक थैरेपी दी थी। अब तो मेरा बेटा भी गीत गाने लगा है।

भावनाबेन सूफी संगीत पर कर रहीं पीएचडी
बता दें, भावनाबेन खुद सूफी संगीत पर पीएचडी कर रही हैं। वहीं, उनकी बड़ी बहन कृष्णा राणींगी पोरबंदर में सुरभि कलावृंद संगीत संस्था चलाती हैं।

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