कार्तिक-रेड चिलीज कंट्रोवर्सी: ट्रेड एनालिस्टों ने कहा-कार्तिक आर्यन ने साइनिंग अमाउंट लौटा दिया तो रेड चिलीज को नहीं ठहराया जा सकता कसूरवार

कार्तिक-रेड चिलीज कंट्रोवर्सी: ट्रेड एनालिस्टों ने कहा-कार्तिक आर्यन ने साइनिंग अमाउंट लौटा दिया तो रेड चिलीज को नहीं ठहराया जा सकता कसूरवार

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करन जौहर की ‘दोस्ताना 2’ से हटाए जाने के महज महीने भर बाद ही कार्तिक आर्यन को अब शाहरुख खान के बैनर रेड चिलीज बैनर की भी एक फिल्म से हटा दिया गया है। इस बैनर के लिए कार्तिक ‘फ्रेडी’ नामक फिल्म करने वाले थे। उसके डायरेक्टर ‘बीए पास’ फेम अजय बहल हैं। कहा जा रहा है कि कार्तिक को इस फिल्म की स्क्रिप्ट पसंद नहीं आई और वे स्क्रिप्ट में कुछ बदलाव करना चाहते थे पर ऐसा न होने पर उन्होंने यह फिल्म छोड़ दी। इसके लिए उन्होंने जो 2 करोड़ रुपए का साइनिंग अमाउंट लिया था, वह भी लौटा दिया है। खास बात यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर यह बहस छिड़ गई है कि क्या रेड चिलीज ने धर्मा प्रमुख करन जौहर के कहने पर कार्तिक को फिल्म से बाहर किया है? क्या कार्तिक को इरादतन बड़े बैनर की फिल्मों से हटवाया जा रहा है।

कार्तिक ने तीन साल पहले साइन की थी फिल्म
इंडस्ट्री से जुड़े कुछ ट्रेड एनालिस्ट्स ने इसके पीछे अलग वजह जाहिर की है। उन्होंने कहा, “यह फिल्म कार्तिक ने तीन साल पहले साइन की थी। तब से लेकर अब तक कार्तिक के स्टारडम में काफी इजाफा हुआ है। ऐसे में कार्तिक ने ज्यादा फीस की डिमांड की और वह न मिलने पर उन्होंने इस फिल्म को छोड़ दिया। अब मुद्दा यह है कि जब उन्होंने साइनिंग अमाउंट भी वापस कर दिया है, तो उन्हें या रेड चिलीज को कसूरवार कैसे ठहराया जा सकता है।” इधर ने इस बारे में कार्तिक, अजय बहल और रेड चिलीज के अधिकारियों से जब इस बारे में बात करने की कोशिश की तो किसी ने भी इसका जवाब नहीं दिया।

फिल्‍म की ऑफिशियली अनाउंसमेंट कभी हुई ही नहीं
इस बारे में ने इंडस्‍ट्री के अनुभवी और क्रेडिबल ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श से बातचीत की। तरण ने इस मसले पर कहा, “पहली बात तो यह है कि अलग होना कभी भी खुशनुमा नहीं होता। कोई न कोई वजह तो होती है। मगर अहम बात यह भी है कि रेड चिलीज की तरफ से ऑफिशियली उनके सोशल मीडिया हैंडल या लिखित में कभी इस फिल्‍म की अनाउंसमेंट हुई ही नहीं है। ऐसे में जब तक खुद रेड चिलीज या कार्तिक की ओर से कथि‍त तौर पर कार्तिक को हटाए जाने के मसले पर स्‍पष्‍टीकरण नहीं आता, तब तक कुछ भी कहना सही नहीं होगा। रहा सवाल कार्तिक आर्यन का तो वो सुभाष घई की कांची के समय से ही बड़े सुलझे हुए इंसान हैं।”

नेपोटिज्‍म का केस है या नहीं इस वक्‍त नहीं कहा जा सकता
तरण आदर्श ने आगे कहा, “ज्‍यादातर मामलों में अलग होना या बिछड़ना खुशनुमा नहीं होता। हालांकि इस मामले में क्‍या हुआ है, वह मुझे नहीं मालूम तो इस पर मैं कमेट नहीं कर सकता। लिहाजा यह नेपोटिज्‍म का केस है या फिर कुछ और वह इस वक्‍त नहीं कहा जा सकता। अतीत में भी ऐसे कई मामले रहें हैं, जहां धर्मेंद्र जी, राजकुमार जैसे दिग्‍गज कलाकारों को फिल्‍में ऑफर हुईं थीं, मगर उन्‍होंने नहीं की। बाद में अमिताभ बच्‍चन उसमें आए। कहने का मतलब यह कि किसी एक्‍टर का किसी फिल्‍म को ना कहना या किसी प्रोडक्शन हाऊस की तरफ से किसी एक्‍टर से अलग होना एक सामान्‍य प्रैक्टिस है।”

इस पूरे मामले को आउटसाइडर वाला रंग देना भी सही नहीं
एनालिस्ट ने कहा, “इस केस में मैं फिर दोहराना चाहूंगा कि रेड चिलीज ने कभी अनाउंस ही नहीं किया कि उन्‍होंने कार्तिक को कभी साइन किया था। ऐसे में इस पूरे मामले को आउटसाइडर वाला रंग देना भी सही नहीं होगा। बेहतर यही होगा कि रेड चिलीज और कार्तिक खुद सामने आकर इस मसले पर स्थिति स्‍प्‍ष्‍ट करें। ‘देवदास’ में जैकी श्रॉफ वाला रोल पहले किसी और को ऑफर हुआ था। ‘बाजीगर’, ‘डर’, ‘जंजीर’ में भी पहले किसी और एक्‍टर को फिल्‍म ऑफर की गई थीं, मगर उन्‍होंने नहीं की थी। बाद में कोई और एक्‍टर बोर्ड पर आए थे।”

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