म्यूकरमाइकोसिस हारा, जिंदगी जीती: किसी ने रखा हौसला तो किसी ने डॉक्टर पर भरोसा, आखिरकार चार महीने में 3 लोगों ने शुरू की नई जिंदगी

म्यूकरमाइकोसिस हारा, जिंदगी जीती: किसी ने रखा हौसला तो किसी ने डॉक्टर पर भरोसा, आखिरकार चार महीने में 3 लोगों ने शुरू की नई जिंदगी

Spread the love

रमेशभाई मांडलिया की सर्जरी के बाद और अबकी फोटो।

कोरोना की दूसरी घातक लहर के बाद अब मरीज एक और खतरनाक महामारी यानी कि म्यूकरमाइकोसिस के शिकंजे में फंसकर जान गंवा रहे हैं। गुजरात के राजकोट में ही सिविल और निजी अस्पतालों समेत 1000 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है। इस बीमारी का सिर्फ इलाज ही महंगा नहीं, बल्कि सर्जरी के दौरान मरीज की जान को भी खतर रहता है।

लेकिन, आज हम उन मरीजों की बात कर रहे हैं, जिन्होंने लंबे समय तक इस महामारी से जंग लड़ी और जीते भी। इसके लिए किसी ने अपने मनोबल को मजबूत रखा तो किसी ने डॉक्टर पर भरोसा रखा और अब पूरी तरह से स्वस्थ हैं।

बीमारी की चिंता को भूल इलाज पर ध्यान दिया
धोराजी में रहने वाले और पेशे से फोटोग्राफर रमेशभाई मांडलिया पांच महीने के इलाज के बाद घर लौटे हैं और फिर से बिजनेस भी संभाल लिया है। रमेशभाई बताते हैं कि कोरोना से मुक्त होने के कुछ दिनों बाद
दांतों में दर्द होने लगा था। जांच में पता चला कि म्यूकरमाइकोसिस यानी की ब्लैक फंगस हो गया है।

62 वर्षीय कनुभाई राडदिया की फाइल फोटो।

62 वर्षीय कनुभाई राडदिया की फाइल फोटो।

मुझे राजकोट के सिविल अस्पताल में कई दिनों तक रोजाना 6 इंजेक्शन दिए गए। एक साइड का जबड़ा और दाहिनी ओर के कुछ दांत भी हटाने पड़े। इसके चलते बोलने में दिक्कत आती है, लेकिन जीवन बेहतर करने की पूरी कोशिश कर रहा हूं। रमेशभाई बताते हैं कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद से ही मैंने इलाज की चिंता को एक तरफ रखकर यही सोच लिया था कि जो भी होगा, देखा जाएगा। बस इसी के चलते इतने लंबे इलाज के बाद भी घर लौट आया।

चार बार सर्जरी और कई दिनों के भारी तकलीफ से गुजरे
ऐसा ही दूसरा मामला मोरबी में रहने वाले भूदरभाई से जुड़ा हुआ है। भूदरभाई डेढ़ महीने तक हॉस्पिटल में भर्ती रहे और इस दौरान उनकी चार बार सर्जरी हुई। इसके चलते वे कई दिनों का भारी तकलीफ से भी
गुजरे। भूदरभाई कहते हैं कि मुझे डॉक्टरों पर भरोसा था। हालांकि, मुझे बहुत तकलीफ से गुजरना पड़ा, क्योंकि इसकी सर्जरी बहुत जटिल होती है। एक बार तो सर्जरी के बाद नाक से खून आने लगा तो उसके लिए डॉक्टर्स को दूसरी सर्जरी करनी पड़ी। लेकिन डॉक्टरों की मेहनत और देखभाल के चलते आज में अपने परिवार से साथ हूं।

कनुभाई राडदिया अपने पोते के साथ।

कनुभाई राडदिया अपने पोते के साथ।

पिता ने धैर्य और डॉक्टरों पर भरोसा रखा
ऐसा ही पॉजीटिव तीसरा मामला जेतपुर में रहने वेले 62 वर्षीय कनुभाई राडदिया से जुड़ा है। कनुभाई के बेटे मनसुखभाई बताते हैं कि कनुभाई कोरोना पॉजीटिव थे। कोरोना से ठीक होने के बाद ब्लैक फंगस हो गया। अस्पताल में भर्ती होना था। लेकिन कोरोना के चलते शरीर में हिम्मत नहीं बची थी। यानी की शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई थी। लेकिन इलाज तो जल्द से जल्द कराना ही था। अस्पताल में भर्ती होने के कुछ दिनों बाद पहली नाक की सर्जरी हुई। इसके बाद दूसरी सर्जरी जबड़ों की हुई। दोनों सर्जरी ठीक रहीं और एक महीने के अंदर मैं ठीक हो गया। अब बेटे के साथ खेती कर रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *